India Travel Tales
औरंगाबाद : पनचक्की तथा एलोरा गुफ़ाएं
औरंगाबाद : पनचक्की तथा एलोरा गुफ़ाएं

औरंगाबाद : पनचक्की तथा एलोरा गुफ़ाएं

एलोरा गुफ़ाएं जिस काल खंड में बनाई गयीं देश में हिन्दू शासक राज्य करते थे और उनको अन्य मतावलंबियों द्वारा अपने मठ और मंदिर बनाने में कहीं कोई आपत्ति नहीं थी। यहां जैन, शैव, वैश्णव व बौद्ध – कुल 100 गुफ़ाएं हैं।

हमारी महाराष्ट्र यात्रा का पहला दिन – औरंगाबाद में ज्योतिर्लिंग दर्शन
हमारी महाराष्ट्र यात्रा का पहला दिन – औरंगाबाद में ज्योतिर्लिंग दर्शन

हमारी महाराष्ट्र यात्रा का पहला दिन – औरंगाबाद में ज्योतिर्लिंग दर्शन

52 दरवाज़ों के इस शहर में आने का हमारा मुख्य ध्येय घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग Ghrishneshwar Jyotirlingam के दर्शन करना है। पर जब औरंगाबाद आये हैं तो एलोरा की गुफ़ाएं व यहां के अन्य आकर्षण देखे बिना भला कैसे जा सकते हैं!

यात्रा संस्मरण लेखक (Travel bloggers)
यात्रा संस्मरण लेखक (Travel bloggers)

यात्रा संस्मरण लेखक (Travel bloggers)

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रामोजी फिल्म सिटी – एक अविस्मरणीय अनुभव
रामोजी फिल्म सिटी – एक अविस्मरणीय अनुभव

रामोजी फिल्म सिटी – एक अविस्मरणीय अनुभव

रामोजी फिल्म सिटी (Ramoji Film City) को समर्पित मेरी ये तीसरी व अन्तिम पोस्ट है। निश्चय ही दुनिया में ऐसे बहुत कम स्थान होंगे जिनका बखान करने के लिये मुझे तीन पोस्ट लिखने की इच्छा व आवश्यकता हो।

रामोजी फिल्म सिटी टूर – चित्रावली
रामोजी फिल्म सिटी टूर – चित्रावली

रामोजी फिल्म सिटी टूर – चित्रावली

यहां से बाहर निकलते ही रेलवे स्टेशन के दर्शन हुए ! सुना है कि ’जा सिमरन, जा ! जी ले तू भी अपनी ज़िन्दगी ’ दृश्य ( दिल वाले दुल्हनियां ले जायेंगे) का क्लाइमेक्स सीन इसी प्लेटफ़ार्म पर फ़िल्माया गया था।

रामोजी फिल्म सिटी – एक अद्‍भुत संसार
रामोजी फिल्म सिटी – एक अद्‍भुत संसार

रामोजी फिल्म सिटी – एक अद्‍भुत संसार

लाल रंग की लगभग 70 HoHo बसें यहां हर कहीं आती – जाती घूमती फिरती रहती हैं। HoHo बोले तो Hop On, Hop Off! आप एक बिन्दु से बस में बैठिये और अगले बिन्दु पर उतर जाइये और जितनी देर चाहें घूमते रहिये। जब मन भर जाये तो बाद में आने वाली किसी भी बस में बैठ कर अगले बिन्दु पर उतर जाइये।

हमारी हैदराबाद यात्रा – स्थानीय भ्रमण
हमारी हैदराबाद यात्रा – स्थानीय भ्रमण

हमारी हैदराबाद यात्रा – स्थानीय भ्रमण

क्या आपने कभी नर्क के दर्शन किये हैं? यदि नहीं और दर्शन करने की इच्छा हो तो बिड़ला मंदिर परिसर की पार्किंग के ऊपर बने हुए डायनासोर म्यूज़ियम के पब्लिक टॉयलेट में हो आइये। टॉयलेट सीट में मल तैरता हुआ मिलेगा, पानी की टोंटी खोलेंगे तो उसमें से पानी नहीं निकलेगा, सीट में या दीवार पर वाटर जैट भी लगा हुआ नहीं होगा और न ही आसपास कहीं साबुन दिखाई देगा। यदि आपकी जेब में कुछ कागज़ / टिशु पेपर वगैरा निकल आयें तो बस, उनसे अपना शरीर साफ़ करने का असफ़ल प्रयास करके, बिना हाथ धोये, आप शर्मिन्दगी से भरे हुए बाहर निकल आइये।

हमारी हैदराबाद यात्रा का दूसरा दिन – सालारजंग म्यूज़ियम
हमारी हैदराबाद यात्रा का दूसरा दिन – सालारजंग म्यूज़ियम

हमारी हैदराबाद यात्रा का दूसरा दिन – सालारजंग म्यूज़ियम

जिन कलाकृतियों ने मुझे दीवाना बना दिया था वह या तो हाथीदांत की कलाकृतियां थीं या फिर आदमकद मूर्तियां थीं। न जाने अब उन जैसे कलाकार इस धरती पर मौजूद हैं या नहीं जो सिर्फ कलाकृति ही नहीं बनाते, बल्कि अपना दिल ही उड़ेल कर रख देते हैं।

हमारी हैदराबाद यात्रा का दूसरा दिन – चारमीनार की सैर

इस श्रंखला की सारी कड़ियां इस प्रकार हैं – हमारी हैदराबाद – महाराष्ट्र तीर्थ यात्रा – पहला दिन श्री शैलम में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन हमारी हैदराबाद – महाराष्ट्र यात्रा का दूसरा दिन – चारमीनार की सैर हमारी हैदराबाद यात्रा…